Maharaja Surajmal History In Hindi | महाराजा सूरजमल की वंशावली

महाराजा सूरजमल का इतिहास के बारे में: प्राचीन काल से ही भारत के लोगो को मुगलों और अंग्रेजों से आजादी पाने के लिए काफी संघर्ष करना पड़ा है। जिसके लिए बहुत से शूरवीर योद्धाओं ने अपना बलिदान दिया है, जिसमें से एक महान योद्धा राजा सूरजमल भी है।

इन्हें राजपूत राजाओं के बीच अकेले शूरवीर जाट महाराजा के रूप में गिना जाता है। महाराजा सूरजमल ने मराठो के साथ मिलकर मुगलों को धूल चटाया था। तो आइए MahaRaja Surajmal History के बारे में विस्तार से जानते हैं।

Maharaja Surajmal History In Hindi (महाराजा सूरजमल का इतिहास)

महाराजा सूरजमल का इतिहास काफी पुराना है, राजस्थान के भरतपुर राज्य में राजा चूड़ामन सिंह के बाद राजा बदन सिंह भरतपुर रियासत के राजा बने। उसके बाद राजा बदन सिंह के घर एक पुत्र ने जन्म लिया जो कि आगे चलकर महाराजा सूरजमल नाम से विख्यात हुए।

महाराजा सूरजमल ने सन 1733 में भरतपुर की स्थापना की थी, और महाराजा सूरजमल ने 1753 तक दिल्ली और फिरोजशाह कोटला तक अपना राजपाट बढ़ा लिया और बखूबी उसकी जिम्मेदारी भी निभाई। जब राजा सूरजमल 25 वर्ष के थे, तब उन्हें सोघरिया रुस्तम पर आक्रमण करने भेजा गया और यह उनका सबसे पहला सफल अभियान रहा था।

महाराजा सूरजमल बहुत ही चतुर, बुद्धिमान, और वीर थे, इनमे एक अच्छे राजा होने के सभी गुण मौजूद थे, जिसके कारण इन्हें जाटों का प्लेटों भी कहा जाता था और इनकी तुलना ऑडिसस से भी की गई है।

राजा सूरजमल जाट ने सन 1733 में खेमकरण सोगरिया को हराकर भरतपुर को हासिल किया था और फिर 1733 में हि इन्होंने भरतपुर रियासत की स्थापना की थी, भरतपुर इस देश का इकलौता ऐसी रियासत है जिससे आज तक सूरजमल जाट से कोई नहीं जीत पाया है, ना मुग़ल और ना अंग्रेज।

|| झुक गए नवाब, झुक गए मुग़ल,

झुक गया था गगन सार…

जो कदे ना झुका कदे ना रूकया

ऐसा था सूरजमल जाट हमारा ||

महाराजा सूरजमल, जाटो के लिए उनका मन, सम्मान और गौरव है, जिन्होंने जाट जाती को एक अलग पहचान दी, आज जाट समुदाय का हर व्यक्ति इनपर गर्व करता है और इन्हे अपना आदर्श मानता है, और माने भी क्यों ना राजा सूरजमल जाट जैसे इस भारत वर्ष में कोई राजा हुआ ही नहीं। इसपर एक कहाबत भी है

Maharaja Surajmal Birthday (महाराजा सूरजमल जयंती कब है)

|| नहीं जाटनी ने सही व्यर्थ प्रसव की पीर, तब जन्मा उसके गर्भ से सूरजमल सा वीर ||

राजा सूरजमल जाट का जन्म 13 फरवरी 1707 को राजस्थान के भरतपुर जिले में हुआ था, उनके पिता का नाम राजा बदन सिंह जाट और उनकी माता का नाम महारानी देवकी था।

महाराजा सूरजमल को सूजन सिंह के नाम से भी जाना जाता है। Raja Surajmal के द्वारा सन 1733 में भरतपुर रियासत की स्थापना की थी। 

प्रतिवर्ष 13 फरवरी को Maharaja Surajmal Jayanti मनाई जाती है। क्योंकि महाराजा सूरजमल एक बहुत ही वीर और साहसी योद्धा थे, जिन्होंने अपना पूरा जीवन अपनी प्रजा और राज्य की सेवा में न्योछावर कर दिया। इसी कारण राजा सूरजमल की याद में 13 फरवरी को हर साल सूरजमल जयंती के रूप में मनाया जाता है।

|| बट रही थी जागीरें जब, बहु बेटियों के डोलो से,

तब एक सूरज निकला, ब्रज भौम के शोलों से,

दिन नही मालूम मगर, थी फरवरी सत्रह सो सात,

जब पराक्रमी बदन के घर, पैदा हुआ बाहुबली सूरजमल जाट ||

महाराजा सूरजमल की वीरता

महाराजा सूरजमल एक बहुत ही वीर और साहसी योद्धा थे और Maharaja Surajmal Ka itihas भी काफी रोचक है। आप महाराजा सूरजमल की वीरता का अन्दाजा इससे लगा सकते है इन्होने अपने जीवन में 80 युद्ध लड़े हैं, जिसमें से एक भी युद्ध नहीं हारे है।

इतिहासकारों का कहना है कि इन्होंने अपने जीवन में कुल 80 युद्ध लड़े हैं, और सभी युद्ध में सफल हुए हैं। तो आइए महाराजा सूरजमल का इतिहास और इनकी वीरता के बारे में जानते हैं-

इन्होंने अपना पहला युद्ध 25 वर्ष की उम्र में सोघरिया रुस्तम पर आक्रमण करके विजई प्राप्त की थी। महाराजा सूरजमल ने सन 1753 में दिल्ली पर शासन कर रहे नवाब गाजी अल्दीन पर हमला किया था। राजा सूरजमल की सेना काफी विशाल थी, जिसका सामना मुगल नहीं कर पाए। यह युद्ध कुल 3 दिनों तक चला था।

जिसमें राजा सूरजमल जाट एक एक करके दिल्ली के सभी प्रमुख इलाकों पर अपना कब्जा कर लिया, इन्होंने यह लड़ाई मराठा साम्राज्य की मदद से लड़ी थी। इस युद्ध के दौरान काफी सेना के लोग मारे गए थे। परंतु राजा सूरजमल की वीरता के कारण 70 साल से चल रहे मुगल शासन को इन्होंने खत्म कर दिया था।

उसके बाद सन 1757 में अहमद शाह अब्दाली दिल्ली पहुंचे, और वे अपनी सेना के साथ मिलकर ब्रज के तीर्थ को खत्म करने के लिए आक्रमण किया, उस समय महाराजा सूरजमल अकेले ही अपने सेना के साथ इस युद्ध में शामिल हुए। इस युद्ध के दौरान इनके सेना के काफी लोग मारे गए परंतु अंततः उन्होंने इस युद्ध में विजय प्राप्त की।

जब सदाशिव राव भाऊ और अहमद शाह अब्दाली के बीच में युद्ध चल रहा था, तब पेशवा बालाजी बाजीराव द्वारा सदाशिव राव भाऊ को परामर्श दिया गया कि वे महाराजा सूरजमल की मदद ले। परंतु सदाशिव राव भावों ने इस परामर्श पर ध्यान नहीं दिया, जिसके कारण इस युद्ध में मराठों को बहुत नुकसान उठाना पड़ा।

उसके बाद लगभग 50 हजार मराठा परिवार महाराजा सूरजमल के राज्य में पहुचे। उसके बाद अहमद शाह अब्दाली ने महाराजा सूरजमल को चेतावनी दी कि वे मरीठो को उन्हें सौंप दे, परंतु महाराजा सूरजमल ने उनकी बात ना मानते हुए डटकर अहमद शाह अब्दाली का सामना किया।

इसके अलावा नजीबुद्दोला ने अहमद शाह अब्दाली के सहयोग से भारत को मजहबी राष्ट्र बनाने की कोशिश कि परंतु राजा सूरजमल ने उनके इस योजना को भी विफल कर दिया। राजा सूरजमल के वीरता के कारण उनका राज्य काफी शक्तिशाली बन गया था और महाराजा सूरजमल एक बहुत ही लोकप्रिय शासक बन गए थे, जिसके कारण मुगल और अन्य राजनीतिक शक्तियां उनकी मदद मांगती थी।

इसके अलावा भी राजा सूरजमल जाट की वीर गाथाओं के बहुत सारे अच्छे कार्य, युद्ध की सफलता और उपलब्धि है, जो कि आज भी इतिहास के पन्नों पर दर्ज है। यह इतिहास के एक ऐसे राजा के रूप में जाने जाते हैं, जो कि कभी भी दुश्मनों के आगे अपना सिर नहीं झुकाए और हमेशा वीरता और सूझबूझ के साथ अपनी प्रजा और अपने राज्य को आगे बढ़ाने की कोशिश की।

महाराजा सूरजमल की मृत्यु कैसे हुई?

महाराजा सूरजमल की मृत्यु मुगल रोहिल्ला सैनिकों द्वारा घात लगाकर किए गए एक हमले में हुई थी। उनकी मृत्यु 25 दिसंबर 1763 को रात के समय हिंडन नदी के तट पर हुई थी।

महाराजा सूरजमल का बलिदान कहां हुआ?

महाराजा सूरजमल का बलिदान हिंडन नदी के तट पर हुआ था। जब महाराजा सूरजमल 25 दिसंबर 1763 को नवाब नजीबुद्दौला के साथ हिंडन नदी के किनारे युद्ध कर रहे थे, तब युद्ध करते वक्त उन्होंने वीरता पूर्ण अपना बलिदान दिया।

महाराजा सूरजमल की वंशावली

महाराजा सूरजमल का वंशावली काफी बड़ा है, एक जानकारी के अनुसार महाराजा सूरजमल के बेटे का नाम जवाहर मल था। जवाहर मल के बेटे का नाम चंद्रमुषी। उनके बेटे चंदमल, फिर चंदमल के बेटे उजागर मल, और उनके बेटे जमाली मल और जमाली मल के बेटे गुमानी व गोधू हुए।

गुमानी कैथल में भाई उदय सिंह की रियासत में चले गए और उन्होंने गांव शेरगढ़ बसा लिया। उस गांव में जाट समाज का केवल मैहला गोत्र हि मौजूद है। फिर गुमानी मल के 7 बेटे हुए जिनका नाम हरभज मल, सादा राम, दोतिया, मोहर सिंह, सुषराम, रुपराम और नंदू।

उसके बाद इन सात भाइयों में से हरभज मल के बेटे आसु राम हुए, और फिर उनके भी 4 बेटे हुए जिनका नाम, रण सिंह, धन सिंह, दीवान सिंह और रामकिशन था। इस तरह से उस गांव में गुमानी मल के 6 बेटों की औलाद है, और पूरे गांव में महिला गोत्र के करीब 200 परिवार रहते हैं।

महाराजा सूरजमल पर कबिता

मां मुझको तलवार दिला दो,

मैं सूरज बन दिखलाऊंगा।

लड़कर देश के दुश्मन से,

भगवा दिल्ली पर लहराऊंगा।।

मां केसरिया बाणा ला दो,

रण में शौर्य दिखलाऊंगा।

या तो विजय होगी अपनी,

या वीरगति को पाऊंगा।।

मां मुझको तलवार दिला दो,

मैं सूरज बन दिखलाऊंगा।।ॐ।।

मां लोहागढ़ की मिट्टी ला दो,

मैं सदा अजेय बन जाऊंगा।

मार मार के तीर कटारे,

दुश्मन को धूल चटाऊंगा।।

मां महाराजा की मूर्ति ला दो,

मैं नित नित शीश झुकाउंगा।

है सबसे ऊपर देश धर्म,

ह्रदय में अपने बसाउंगा।।

मां मुझको तलवार दिला दो,

मैं सूरज बन दिखलाऊंगा।।ॐ।।

यह कबिता भाई, जयदीप सिंह नेन जी ने लिखी है, इस सुन्दर कबिता का श्रेय भी इन्हे ही जाता है अगर आपको कविता अच्छी लगे तो शेयर जरूर करें और अपने बच्चों को भी सुनाएं व याद करवाएं।

आज हमने क्या जाना

आज हमने आप सभी को अपने इस पोस्ट के जरिए महाराजा सूरजमल का इतिहास, और उनसे जुड़ी हुई बहुत सारी जानकारियों के बारे में बताने का प्रयास किया है। आशा करते हैं कि आपको हमारे इस पोस्ट के जरिए Raja Surajmal History In Hindi के बारे में काफी अच्छी जानकारी प्राप्त हुई होगी।

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FAQs

महाराजा सूरजमल का दूसरा नाम क्या था?

महाराजा सूरजमल का दूसरा नाम सूजान सिंह था।

महाराजा सूरजमल ने कुल कितने युद्ध लड़े थे?

महाराजा सूरजमल ने अपने जीवन में कुल 80 युद्ध लड़े और सभी में जीत प्राप्त की।

जाटों का प्लेटो किसे कहा जाता था?

महाराजा सूरजमल को जाटों का प्लेटो कहा जाता था

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