क्या आपको पता है बिल्ली किस देवता की सवारी  है, अगर नहीं तो अगर पढ़े। 

बिल्ली एक ऐसा जिव है जो हमारे घरो  में भी पाया जाता है लेकिन हम बहुत कम जानते है की बिल्ली किसकी सवारी है

बिल्ली को अलक्ष्मी की सवारी माना जाता है। अलक्ष्मी दरिद्रता की अधिष्ठात्री देवी हैं। अलक्ष्मी विष्णु-पत्नी लक्ष्मी की बड़ी बहिन है जो 'अधर्म' की पत्नी हैं।

अलक्ष्मी अर्थात दरिद्रता का निवास इन स्थानों पर होता है गृहक्लेश, झूठ बोलने वाले व्यक्ति, संध्या के समय सोने वाले व्यक्ति, देव का पूजन न होता हो, अतिथियों का सत्कार न होता हो

बि‍ल्ली को करीब 10 हजार वर्ष पहले अफ्रीकी जंगली बिल्ली से पालतू बनाया गया था।

ज्योतिष और वास्तु शास्त्र में बिल्ली से जुड़े शकुन-अपशकुन का महत्व सभ्यता के प्रारंभ से ही हैं। लोगों का मानना है कि अगर कोई काली बिल्ली रास्ता काट जाए तो मार्ग में अपशकुन हो जाता है।

शास्त्रानुसार सोते समय बिल्ली का किसी व्यक्ति पर गिरना उसकी मृत्यु का प्रतीक माना जाता है। बिल्ली का रोना तथा आपस में लड़ना गृहक्लेश का सूचक है।

सिर पर पंजा मार दे तो उस स्त्री के नाती-पोतों पर संकट पैदा हो जाता है। बिल्ली का चुपके से दूध पी जाना धन के नाश का प्रतीक है। बिल्ली का पालना भी अशुभता का प्रतीक है।

अलक्ष्मी हमेशा बिल्ली की सवारी करती हैं। जहां मास और मदिरा का भक्षण किया जाता है यां जहां सनातन संस्कृति के विपरीत आचरण होता है वहां बिल्लियां अधिक पाई जाती है।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार बिल्ली राहू का प्रतीक है। यह सदेव कबूतरों, चूहों और पक्षियों का शिकार करती है। चूहे तथा पक्षी केतु ग्रह का प्रतीक माने जाते हैं। जिस घर में चूहे यां पक्षियों का शिकार बिल्ली द्वारा किया जाता है वहां राहू का प्रबल और केतु का निर्बल हो जाता है

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